सोमवार, 1 अगस्त 2016

सच्चिदानंद भारती, चाल-ताल-खल (उफ्रेखाल,पौड़ी से)

शोध यात्रा में आज का दिन(18 जुलाई) सबसे विशेष रहा। झमाझम बरसात के बाद, सुबह 9 बजे पौड़ी से लगभग 120 किमी दूर उपरेखाल पंहुचा। बैजोव, उपरेखाल से 25 किमी पहले, से आगे आते ही माहौल में त्वरित परिवर्तन महसूस हुआ। चारों ओर खूबसूरत फसलों से लहलहाते सीढ़ीदार खेत, बाँज,उतीश के पेड़ों से भरी घाटी, खेतों में काम करते लोग। ये सब देख के लगा,मानों भगवान ने कुम्हार की तरह खुद अपने हाथों से इसे तराशा हो लेकिन यह एक इंसान का लोगों के सहयोग से वर्षों की मेहनत का फ़ल हैं। कुछ दूर चलने के बाद वो प्रकृति का कुम्हार, जंगलों को बनाने वाले, पानी पैदा करने वाले श्री सचिदानंद भारती जी मिले। जितने महान काम, उतने सरल इंसान।
आज सारा दिन उनके साथ बिताया, आसपास के जंगलों में घुमा, ताल-खाल के प्रयोग देखें, गाड-गंगा नदी को देखा, उनकी कहानी जानने की कोशिश की। इतना सब देखकर लगा कि एक इंसान क्या क्या कर सकता हैं?और अगर वो ठान ले तो सब कुछ कर सकता हैं।
20 year, 30000 taal-khal,connected 150 villages of pauri,chamoli,almora district,
, recharge Daard Ganga river and many more.
...भारती जी की शेष बातें थीसिस में।
...मुकेश बोरा।




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