गुरुवार, 21 फ़रवरी 2019

उत्‍तराखंड के विकास के लिए सुझाव- आदर्श कुटीर योजना

पहाड़ के विकास का मॉडल उसकी मूल प्रकृति से जुड़ा होना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि स्थानीय विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए काम किए जाएं। लोगों को संस्कृति और उनके संसाधानों से जोड़ने के प्रयास किए जाएं। यहां विकास से अभिप्राय जीवन शैली में गुणात्‍मक सुधार के सा‍थ रोजगार की उपलब्धता कराना हैं। जिसमें जैविक उत्पादपर्यटनवानिकीजड़ी-बूटी उत्पादनगौ उत्पादसौर-ऊर्जालघु एवं कुटीर उघोगोंयोग एवं वैकल्पिक चिकित्सा उपक्रम आदि क्षेत्रों में काम करके रोजगार मुहैया कराया जा सकता है। इस क्षेत्रों में काम करके स्थानीय लोगों को रोजगार तो मिलेगा और साथ ही पहाड़ की संस्कृति और पर्यावरण का भी उन्नयन होगा।
इस माडॅल की विशेषताएं हैं।
1. सामुदायिकता
2. प्रकृति से जुड़ा हुआ
3. संस्कृति एवं संस्कार युक्त
4. स्वच्छता का विशेष ध्यान
5. नशा मुक्त
6. स्वावलंबी
7. आध्यात्मिक वातावरण


आदर्श कुटीर योजना-

 परिवार, समाज की सबसे छोटी इकाई होती है। समाज के विकास का रास्ता परिवार से होते हुए जाता है। परिवार निर्माण के बाद ही समाज निर्माण की सोची जा सकती है। गांव को आदर्श बनाने से पहले कुछ घरों को माडॅल के तौर पर विकसित करने की जरूरत है। अतः इस योजना के तहत प्रारम्भिक तौर पर एक जिले के कुछ घरों को चिन्हित करके प्रारम्‍भ की जा सकती है। बाद में इसे शेष उत्तराखंड में भी लागू किया जा सकता है।

क्‍या हो आदर्श कुटीर में सुविधांए

1. देशी गाय- कम से कम दो देशी गाय होनी चाहिए। जिनके दूध के साथ-साथ गौमूत्र का भी प्रयोग किया जा सकता है। इससे पंचगव्य घ्रत, गौमूत्र अर्क आदि बनाया जा सकता है।

2. गोबर गैसं प्लांट- यह लगभग तीन घनमीटर का प्लांट होगा जिसके माध्यम से प्रतिदिन सात किलों गैंस का उत्पाद होगा जिससे भोजन के अतिरिक्त अन्य जरूरतों के लिए ईधन को प्रयोग किया जा सकता है।

3. जैविक कृषि एवं वानिकी - पहाड़ी राज्य में खेतों का आकार छोटा होता है लेकिन मिट्टी की प्रकृति जैविक उत्पादों के लिए उपयुक्त है। आज जैविक फल, सब्जियों के लिए बाजार में बहुत मांग है। प्रारम्भ में इसके लिए कम से कम 1 एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी। जैविक के लिए आवश्यक अवयव निम्न हैं।
जीरो बजट फार्मिग- जैविक कीटनाशक एवं जैविक खाद निर्माण एवं इस्तेमाल।
वर्मी कम्पोस्ट
चकबंदी- परिसर की तार-बाड़।
सिंचाई की व्यवस्था

4. सौर ऊर्जा प्लांट- पहाड़ों में सुर्यताप हमेशा बना रहता है इसलिए सौर ऊर्जा वैकल्पिक सौर ऊर्जा का साधन हो सकता है। जिसे व्यक्तिगत प्रयोग के साथ व्यवसायिक उपयोग भी किया जा सकता है।

5. वर्षा जल संचयन- पानी के संचयन के साथ साथ तेज बहाब हो भी रोकेगा। संचयित जल से सिंचाई इत्यादि का किया जा सकता है।

6. यज्ञोपैथी एवं संगीत चिकित्सा- वैज्ञानिक शोधों के निष्कर्ष के पता चला है कि यज्ञ चिकित्सा एवं संगीत चिकित्सा के माध्यम से कृषि में उत्पादकता में वृद्धि की जा सकती है।

7. सुलभ शौचालय- स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक परिवार में शौचालय का उचित प्रबंध होना चाहिए।

8. कम्प्यूटर एवं इन्टरनेट की व्यवस्था- आज के सूचना प्रौद्योगिकी के युग में कम्प्यूटर और इंटरनेट सामान्य व्यक्ति को वैश्विक समाज से जोड़ने के लिए आवश्यक है। सोशल मीडिया के उपयोग आपके छोटे से व्यवसाय को बढ़ा सकता हैं।

9. लघु एवं कुटीर उघोग- हवन सामाग्री, अगरबत्ती, देशी मसाले जैसे प्रयासों से स्वाबलम्बन को बढ़ावा दिया जा सकता है।

10. होम स्टे पर्यटन- अपने घर में एक कमरा पहाड़ी संस्कृति के आधार पर तैयार करना जिसके पर्यटक संस्कृति के प्रसार के साथ, आजीविका में भी वृद्धि होगी।

 ये सभी प्रकार की सुविधाओं केे लिए अनेक सरकारी योजनाएं है, आवश्‍यकता है कि इन्‍हे समायोजित एवं समग्र तौर क्रियान्‍वयन किया जाए। जिसमें इन सभी योजनाओं का एक पैकेज बनाया जा सकता है।


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